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अब 14 साल की नाबालिग लड़की ने सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात की मांगी इजाजत, जानें पूरा मामला


सुप्रीम कोर्ट में 14 साल की एक नाबालिग लड़की ने अर्जी दाखिल कर गर्भपात करने की इजाजत मांगी है.

सुप्रीम कोर्ट में 14 साल की एक नाबालिग लड़की ने अर्जी दाखिल कर गर्भपात करने की इजाजत मांगी है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 14 साल की एक नाबालिग लड़की (Minor Girl) ने अर्जी दाखिल कर गर्भपात (Abortion) करने की इजाजत मांगी है. लड़की अभी 26 सप्ताह की गर्भवती है.

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 14 साल की एक नाबालिग लड़की (Minor Girl) ने अर्जी दाखिल कर गर्भपात (Abortion) करने की इजाजत मांगी है. नाबालिग लड़की अभी 26 सप्ताह की गर्भवती है. लड़की ने अपने अर्जी में कहा है कि उसके चचेरे भाई ने उसके साथ रेप किया, जिससे वह गर्भवती (Pregnant) हो गई है. लड़की की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट मांगी है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अगुवाई वाली बैंच में चल रहा है. फिलहाल बैंच ने इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक टाल दी है.

क्या कहता है कानून
बता दें कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट- 1971 के मुताबिक 20 हफ्ते के बाद गर्भपात कराने पर रोक है. इस एक्ट के धारा 3 में यह भी कहा गया है कि अगर गर्भ के कारण गर्भवती की जान खतरे में हो या फिर दिमागी और शारीरिक स्वास्थ्य खतरे में हो या गर्भ में पल रहा बच्चा विकलांगता का शिकार हो तो गर्भपात कराया जा सकता है. महिला अगर बालिग है तो इसके लिए सहमति जरूरी है.

भारत में गर्भपात कितने हफ्ते तक जायज?भारत में 12 सप्ताह तक गर्भपात जायज है. वहीं, 12 सप्ताह से 20 सप्ताह तक गर्भपात मान्यताप्राप्त डॉक्टरों की सलाह पर कुछ शर्तों के साथ कराया जा सकता है. अगर गर्भवती को या फिर बच्चे को जान पर खतरा हो तो गर्भपात कराया जा सकता है. 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की तभी इजाजत मिलती है जब गर्भवती या बच्चा को गंभीर खतरा हो. ऐसे में इस केस में अदालत के सामने एक अजब स्थिति पैदा हो गई है.

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पहले के कुछ फैसले किन परिस्थितियों में लिए गए
कुछ दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला को उसका 23 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी थी. भ्रूण (Infant) में कई असामान्यताएं होने की वजह से जन्म के बाद बच्चे को कई सर्जरी की आवश्यकता होती. इसलिए कोर्ट ने महिला को गर्भपात की अनुमति दी थी. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी 26 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत दी थी क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे का स्कल नहीं था. लेकिन, वहीं एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डाउन सिंड्रोम के शिकार भ्रूण की मां को गर्भपात की इजाजत नहीं दी थी.








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