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एलएसी और एलओसी पर रणनीति के लिए भारतीय सेना करेगी मंथन, नए हथियारों का रोडमैप भी होगा तैयार


सैन्य प्लान के लिए दिल्ली में थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अध्यक्षता में सेना के सभी कमान के कमांडर बैठक करेंगे.

सैन्य प्लान के लिए दिल्ली में थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अध्यक्षता में सेना के सभी कमान के कमांडर बैठक करेंगे.

Indian Army Commanders Meeting: भारतीय सेना की कमांडर कॉन्फ़्रेंस में पाकिस्तान के मौजूदा सीजफायर के बावजूद किसी स्थितियों से निपटने की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी.

नई दिल्ली. पिछले 13 महीने से पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच विवाद बना हुआ है और इसी दौरान एलएसी से सटे चीन के कब्जे वाले तिब्बत में तेज़ी से सैन्य निर्माण चल रहा है. ऐसे में भारत भी अपनी सामरिक रणनीति को लगातार बदलते हुए अपनी तैयारियों को तेज किए हुए है. इस साल सैन्य प्लान के लिए दिल्ली में थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अध्यक्षता में सेना के सभी कमान के कमांडर एक बड़ी बैठक करेंगे. 17 और 18 जून को होने वाली इस कमांडर कॉन्फ़्रेंस में वाइस चीफ, डिप्टी चीफ सहित सभी कमान के आर्मी कमांडर और प्रिंसिपल स्टाफ ऑफ़िसर के साथ साल भर की रणनीति पर चर्चा होगी.

चर्चा के सबसे महत्वपूर्ण विषय में से एक है एलएसी और एलओसी यानी की वेस्टर्न, नॉर्दर्न, ईस्टर्न और सेंट्रल सेक्टर में पिछले सालों में तय किए गए ग्राउंड प्लानिंग एजेंडे की समीक्षा. साथ ही आने वाले दिनों में जो भी निर्माण कार्य किया जाना है उसकी प्लानिंग भी की जाएगी. बाक़ायदा पूरी प्रेजेंटेशन के जरिए रोडमैप के बारे में न सिर्फ समझाया जाएगा, बल्कि उनके हर पहलू पर चर्चा भी की जाएगी. क्योंकि कोरोना के चलते बहुत से ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो कि बाधित हुए हैं, उसे भी जल्द-से-जल्द पूरा करने का रोड मैप तैयार किया जाएगा.

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चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैनाती पूरी सर्दियों के लिए रखी है और इस तरह की तैनाती अब फिलहाल स्थायी होती दिख रही है. पिछले साल तो आनन-फ़ानन में सैनिकों के रहने और बाकी ज़रूरतों को पूरा किया गया था, लेकिन जिस तरह के हालात फिलहाल दिख रहे हैं, इसमें तो स्थायी बंदोबस्त भी किए जा रहे हैं और कैसे काम समय से पूरा किया जाए व मौजूदा हालत में किसी काम की क्या प्राथमिकता होगी… इस पर सेना के कमांडर मंथन करेंगे.

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लॉजेस्टक सपोर्ट के साथ साथ हाइ ऑल्टिट्यूड इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और नए फ़ील्ड अस्पताल बनाना, सेना के कोर के स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों और संबंधी जिस भी चीज़ की जरूरत है उसका रिव्यू किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक़ बीआरओ की तरफ से भी एक प्रेजेंटेशन दिया जाएगा जिसमें सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण रोड के चल रहे निर्माण कार्य और उसकी मौजूदा स्थित की जानकारी दी जाएगी. हालांकि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन ने कोरोना काल में अपने काम की रफ़्तार को कम नहीं होने दिया और लगातार काम को जारी रखा है. चीन के रुख को देखते हुए लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट में भी तमाम सामरिक महत्व के काम जारी रहे.

बैठक में पाकिस्तान के मौजूदा सीजफायर के बावजूद किसी स्थितियों से निपटने की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी. एजेंडे में थियेटर कमांड के साथ इंटीग्रेट बैटल ग्रुप की रूपरेखा और आने वाले साल में कैसे इसका इंपलिमेंट किया जाएगा… ये भी एक बड़ा मुद्दा होगा. सेना को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कैसे आत्मनिर्भर बनाना है और टू फ़्रंट वॉर की संभावनाओं के तहत तकनीकी तौर पर कैसे नए उन्नत और अत्याधुनिक हथियार के जरिए सेना का आधुनिकीकरण किया जाना है… उस पर भी विस्तार से चर्चा होगी. सैनिकों, रिटायर्ड सैनिकों और वीर नारियों से जुड़े अलग-अलग मुद्दे भी इस बैठक में उठाए जाएंगे. चूंकि ये कमांडर्स कॉन्फ़्रेंस साल में दो बार आयोजित की जाती है. इस साल भी इसे अप्रैल में आयोजित होना था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते इसे स्थगित किया गया था.









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