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कृषि कानूनों के खिलाफ अब गुजरात में बिगुल फूकेंगे राकेश टिकैत, मां अंबाजी मंदिर में टेका मत्था


भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत. (एएनआई/18 मार्च 2021)

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत. (एएनआई/18 मार्च 2021)

Rakesh Tikait in Gujarat: राकेश टिकैत से जब पूछा गया कि क्या वह कोविड-19 नेगेटिव रिपोर्ट लेकर आये हैं, जो गुजरात में यात्रा करने के लिए रखना अनिवार्य है, तो उन्होंने हां में जवाब दिया.

अहमदाबाद. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत (BKU Leader Rakesh Tikait) ने गुजरात (Gujarat) का अपना दो दिवसीय दौरा रविवार को बनासकांठा जिले में मां अंबाजी मंदिर में मत्था टेकने के साथ शुरू किया. टिकैत इस दौरान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रचार करेंगे. टिकैत ने गुजरात की सीमा में प्रवेश करने के दौरान भाजपा और केंद्र पर परोक्ष तौर पर निशाना साधने के लिए पत्रकारों को अपना पासपोर्ट दिखाया और कहा कि यदि गुजरात में प्रवेश करने के लिए इसकी आवश्यकता पड़ी, तो उसे ध्यान में रखते हुए वह इसे लेकर आए हैं.

टिकैत पड़ोसी राज्य राजस्थान के आबू रोड स्टेशन पर ट्रेन से उतरे, जहां किसानों ने उनका स्वागत किया. टिकैत से जब पूछा गया कि क्या वह कोविड-19 नेगेटिव रिपोर्ट लेकर आये हैं, जो गुजरात में यात्रा करने के लिए रखना अनिवार्य है, तो उन्होंने हां में जवाब दिया और कहा, ‘‘मेरे पास सभी दस्तावेज हैं. यह मेरा पासपोर्ट है, यदि गुजरात में प्रवेश करने के लिए इसकी आवश्यकता हो.’’

गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीच 10 से अधिक दौर की बातचीत गतिरोध खत्म करने में विफल रही है.

क्या है मामला

कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.









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