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क्या पश्चिम बंगाल में सेफ गेम खेल रही है कांग्रेस? चुनाव प्रचार तो यही कह रहा


पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी. (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी. (फाइल फोटो)

कुछ चुनावी सभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस को छोड़ दिया जाए तो अभी तक ज्यादातर कांग्रेसी नेता कम ही दिखाई दिए हैं. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ज्यादातर अपनी लोकसभा सीट मुर्शिदाबाद और हावड़ा के कुछ इलाकों पर ही ध्यान देते देखे गए हैं.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में दो चरण की वोटिंग (Two Phase Voting) संपन्न हो चुकी है लेकिन कांग्रेस (Congress) अभी तक इन दोनों में कहीं दिखाई नहीं दी है. कुछ चुनावी सभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस को छोड़ दिया जाए तो अभी तक ज्यादातर कांग्रेसी नेता कम ही दिखाई दिए हैं. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ज्यादातर अपनी लोकसभा सीट मुर्शिदाबाद और हावड़ा के कुछ इलाकों पर ही ध्यान देते देखे गए हैं.

राज्य में कांग्रेस ISF और लेफ्ट के साथ गठबंधन में 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पहले के दो चरणों में कांग्रेस के खाते में 13 सीटें थीं. लेकिन शायद ही किसी ने इन सीटों पर बड़े नेताओं को चुनाव प्रचार करते देखा हो. अकेल राज्य प्रभारी जितिन प्रसाद ही जिम्मेदारियां संभालते दिखे. कभी कभी उनके साथ कुछ और नेता भी दिखाई दिए.

आखिरी के तीन चरणों में सभी स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारेंगे
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक हर फेज के लिए बड़ी स्टार प्रचारक लिस्ट तैयार की गई है. इनका फोकस आखिरी के तीन चरणों पर है. आखिरी के तीन चरणों में जिन सीटों पर चुनाव होना है वहां पर पार्टी की मौजूदगी ठीक-ठाक है. एक कांग्रेस नेता का कहना है-हम वहां अपनी ऊर्जा नहीं बर्बाद करना चाहते जहां हमारी उस्थिति नहीं है. आखिरी चरणों में हम अपने सभी स्टार प्रचारकों को उतारेंगे.बीजेपी ने बदल दिए हैं खेल के नियम

अब अगर इसकी तुलना बीजेपी से की जाए तो बिल्कुल उलट स्थिति है. कांग्रेस लीडरशिप से नाराजगी जाहिर करने वाले जी23 के एक नेता का कहना है-कुछ साल पहले बीजेपी की पश्चिम बंगाल में कोई पोजीशन नहीं थी. लेकिन क्या वो इसी स्थिति में बने रहे? और आज देखिए वो मुख्य चैलेंजर हैं. वो कभी भी सेफ गेम नहीं खेलते. वो रिस्क लेते हैं. आखिरकार वो मुख्य चैलेंजर के तौर पर उभरते हैं और लोगों के बीच ये संदेश भेजने में भी कामयाब रहते हैं कि वो हर चुनाव को गंभीरता से लेते हैं. कांग्रेस अपने वर्तमान एप्रोच के साथ सफलता नहीं पा सकती. खेल के नियम बदल चुके हैं.

(पल्लवी घोष की पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है. यह मूल रूप में अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है.)









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