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चीन ने अमेरिका को छोड़ा पीछे, बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार…


चीन 2020 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

चीन 2020 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

चीन 2020 में अमेरिका को पीछे छोड़कर एक फिर से भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. सरकार के आत्मनिर्भर भारत पर जोर के बावजूद चीन से आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ी है.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 23, 2021, 3:17 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति होने के बावजूद एक बार फिर चीन 2020 में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में सामने आया है. भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन के बीच पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार 77.7 अरब डॉलर का रहा, हालांकि यह 2019 की तुलना में कम है. साल 2019 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 85.5 अरब डॉलर रहा था. महामारी के कारण मांग में कमी से 2020 में भारत और अमेरिका के बीच 75.9 अरब डॉलर का व्यापार हुआ.

चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार घाटा 40 बिलियन डॉलर- पिछले साल सीमा तनाव के चलते मोदी सरकार ने कई चीनी ऐप सहित चीन पर निर्भरता कम करने के लिए निवेश की मंजूरी को धीमा कर दिया था. इस दौरान सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पर काफी जोए भी दिया था. बावजूद इसके भारत चीन निर्मित भारी मशीनरी, दूरसंचार उपकरण और घरेलू उपकरण पर काफी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है. जिसकी वजह से चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार घाटा करीब 40 बिलियन डॉलर का रहा. जो भारत का किसी भी देश के साथ सबसे ज्यादा व्यापार घाटा है.

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अमेरिका और यूएई रहे दूसरे और तीसरे बड़े साझेदार- 2020 में भारत का चीन से कुल 58.7 बिलियन डॉलर का आयात रहा अमेरिका और यूएई से किए गए संयुक्त आयात से ज्यादा है. अमेरिका और यूएई भारत के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. भारत ने कोरोनो महामारी के दौरान होने वाली मांग के बीच अपने एशियाई पड़ोसी से आयात कम करने के लिए कई प्रबंधन के हैं. जबकि उसका निर्यात 2019 की तुलना में 11 फीसदी बढ़कर 19 अरब डॉलर पहुंच गया.कोरोना महामारी से डगमगाई चीन की अर्थव्यवस्था- हालांकि चीन की अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के कारण पहली तिमाही में ख़राब हो गई थी, लेकिन साल के आख़िर में आर्थिक स्थिति सुधरने के कारण यूरोपीय संघ के सामानों की मांग बढ़ी. वर्ष 2020 में प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में चीन ही एकमात्र देश था, जहां आर्थिक विकास देखा गया. इस बीच मेडिकल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स की भारी मांग के कारण यूरोप में चीन के निर्यात को भी फ़ायदा मिला.








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