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जानिए केरल चुनाव में किन सीटों पर होगा दिलचस्प मुकाबला Kerala Elections 2021 Sabarimala Metro Man Know All About Key Assembly Seat


तिरुवनंतपुरम. केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 6 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. ऐसे में रविवार को शाम पांच बजते ही इस राज्य में चुनावी प्रचार का शोरगुल शांत हो जाएगा. इस बीच, केरल में चुनाव प्रचार के समापन के तौर पर पारंपरिक तौर पर पार्टियों द्वारा निकाली जाने वाली रैली का आयोजन इस बार नहीं होगा क्योंकि इस पर निर्वाचन आयोग ने रोक लगा दी है.

राज्य निर्वाचन अधिकारी टीका राम मीणा के आग्रह पर भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार के अंत में पारंपरिक तौर पर निकाली जाने वाली बड़ी रैली पर रोक लगा दी. राज्य में छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले रविवार को पार्टियां यह बड़ी रैली निकालने वाली थी.

इन विधानसभा सीटों पर देखने को मिलेगा दिलचस्प मुकाबला

कोन्नीसबरीमला विवाद के दौरान प्रदर्शन का एक अहम केंद्र रहा कोन्नी पर इस बार भाजपा की नजर है. इस पर्वतीय विधानसभा सीट पर भाजपा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को मैदान में उतारा है. उनका मुकाबला यहां से विधायक और एलडीएफ के.यू जेनिश कुमार एवं यूडीएफ के रॉबिन रीटर से है. सबरीमला आंदोलन के समय मुख्य केंद्र बना यह विधानसभा क्षेत्र एक ओर जहां भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, वहीं हाल के दिनों में रबड़ की कीमतों में गिरावट की वजह से प्रभावित इस इलाके में विकास का मुद्दा भी अहम भूमिका निभा सकता है.

नेमम
2016 के विधानसभा चुनाव में नेमम उस वक्त राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा था, जब भाजपा ने केरल चुनाव में अपने स्टार उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल की बदौलत अपनी जीत का खाता खोला था. राजगोपाल ने सीपीआई-एम के नेता वी. और सिवनकुट्टी और कांग्रेस नीत यूडीएफ के उम्मीदवार एवं राज्य के पूर्व मंत्री वी. सुरेंद्रन पिल्लई को शिकस्त दी थी. इसके बाद सीपीआई-एम लंबे समय तक कांग्रेस को इस बात के लिए ताना मारती रही कि उसने राजगोपाल को जिताने के लिए एक कमजोर उम्मीदवार को खड़ा किया और खुद राजगोपाल ने भी कथित तौर पर यूडीएफ व भाजपा के बीच ‘वोट ट्रेडिंग’ की बात कही. यही कारण है कि इस सीट को जीतना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है और पार्टी ने यहां से वर्तमान सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के बेटे के. मुरलीधरन को अपना उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, भाजपा ने इस सीट को फिर अपने पाले में करने के लिए मेघालय के पूर्व राज्यपाल कुम्मानम राजशेखरन को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि सीपीएम ने अपनी खोई साख को वापस पाने के लिए सिवनकुट्टी पर भरोसा दिखाया है.

पाला
2019 में आयोजित केरल उपचुनाव में वाम उम्मीदवार के तौर पर केरल कांग्रेस (एम) का गढ़ रहे पाला सीट पर जीत दर्ज करने वाले मणि सी. कप्पन इस बार यूडीएफ कैंडिडेट हैं जिनका मुकाबला एलडीएफ उम्मीदवार और केरल कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष जोस के. मणि से है. अपने पिता और केरल कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे के.एम मणि के निधन के बाद जोस मणि जब आखिरी बार बतौर यूडीएफ उम्मीदवार इस सीट से चुनावी मैदान में थे, तो उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. इस तरह से देखा जाए, तो सत्तारूढ़ एलडीएफ और कांग्रेस नीत यूडीएफ दोनों के लिए ही यह सीट बेहद अहम है.

धर्मदम
उत्तरी केरल के कन्नूर जिले की धर्मदम विधानसभा सीट सिर्फ इस वजह से अहम हो जाता है कि यहां से केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन चुनावी मैदान में हैं और फिर से अपनी सीट को बचाने की कोशिश करेंगे. मजेदार बात यह है कि इस सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, यह तय करने में पार्टी को ग्यारह घंटे का वक्त लग गया जो यह दिखाता है कि धर्मदम विधानसभा सीट की हवा किस ओर बह रही है. यहां से भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सी.के. पद्मनाभन और कांग्रेस ने सी. रघुनाथ को चुनावी मैदान में उतारा है. लेकिन सीएम पिनराई विजयन के लिए असली चुनौती ‘वलयार बहनों’ की मां की तरफ से आ सकती है. दरअसल पलक्क्ड़ जिले के वलयार में 2017 में दो लड़कियों के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया था और वे अपने घर में फंदे पर लटकी हुई पाई गई थीं. तभी से दोनों नाबालिग लड़कियों की मां राज्य सरकार से न्याय की मांग कर रही है और सीएम विजयन के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरी है. हालांकि सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. पलक्कड़ जिले के वलयार में 13 जनवरी 2017 को 13 वर्षीय एक लड़की को अपनी झोपड़ी में फांसी के फंदे पर लटका हुआ पाया गया था और चार मार्च को उसकी नौ वर्षीय बहन की मौत भी इसी तरह हुई थी.

पलक्कड़
केरल में छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में पलक्कड़ सीट पर युवा बनाम बुजुर्ग की लड़ाई में भाजपा की तरफ से ‘मेट्रोमैन’ ई. श्रीधरन कांग्रेस के मौजूदा विधायक शफी परमबिल को चुनौती देंगे और प्रौद्योगिकीविद के अपने करिश्मे को वोटों में तब्दील करने की कोशिश करेंगे. इस बार पलक्कड़ में त्रिकोणीय चुनाव की उम्मीद है क्योंकि सत्तारूढ़ एलडीएफ ने भी भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देते हुए पहली बार यहां से अपना उम्मीदवार उतारा है. यह सीट 2011 से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के पास है. हाल के नगर निकाय चुनावों में पलक्कड़ में अपनी सफलता से उत्साहित भाजपा ने 38 वर्षीय परमबिल के मुकाबले 88 वर्षीय श्रीधरन को चुनावी मैदान में उतारा है. परमबिल तीसरी बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं. भाजपा प्रत्याशी के तौर पर श्रीधरन के अप्रत्याशित रूप से चुनावी मैदान में उतरने से खजूर के पेड़, धान के खेत और रथ दौड़ की भूमि पलक्कड़ पर देशभर के लोगों की निगाहें हैं. यूडीएफ ने एक बार फिर परमबिल पर भरोसा जताया है, वहीं सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाली एलडीएफ हाल के नगर निकाय चुनावों में किए गए अपने अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित है. उसने इस सीट पर एक नये चेहरे सी पी प्रमोद को उतारा है. 2016 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कुल 1.37 लाख वोट पड़े थे. कांग्रेस के शफी को 57,559 वोट मिले थे, जबकि उनकी निकट प्रतिद्वंद्वी भाजपा की शोभा सुदंरन को 40,076 वोट मिले थे और माकपा उम्मीदवार एन. एन. कृष्णादास को 38,675 वोट मिले थे. कांग्रेस विधायक ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि पलक्कड़ के मतदाता पिछले 10 सालों में उनके प्रदर्शन से खुश हैं और उन्हें विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का एक और मौका देंगे. वहीं एलडीएफ प्रत्याशी प्रमोद कांग्रेस और भाजपा को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वह अधिकतम मतदाताओं तक पहुंचने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. इस सीट पर उनकी उम्मीदें पिछले संसदीय चुनाव के दौरान पलक्कड़ विधानसभा सीट पर वाम मोर्चे को मिले वोटों पर टिकी हैं. एलडीएफ प्रत्याशी एम बी राजेश को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 32.83 प्रतिशत वोट मिले थे. 2016 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कुल 1.37 लाख वोट पड़े थे. शफी को 57,559 वोट मिले थे, जबकि उनकी निकट प्रतिद्वंद्वी भाजपा की शोभा सुदंरन को 40,076 वोट मिले थे और माकपा उम्मीदवार एन. एन. कृष्णादास को 38,675 वोट मिले थे.





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