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बाल श्रम व बंधुआ मजदूरी के शिकार बच्‍चों के पुनर्वास के लिए हाई कोर्ट से प्रार्थना


 दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल कर राष्ट्रीय राजधानी में मुक्त कराये गये बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के शिकार 16 और बच्चों के पुनर्वास के लिए तत्काल वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया गया है.

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल कर राष्ट्रीय राजधानी में मुक्त कराये गये बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के शिकार 16 और बच्चों के पुनर्वास के लिए तत्काल वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया गया है.

बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के शिकार बच्‍चों को मुक्‍त कराए जाने के बाद उनके पुनर्वास के लिए तत्‍काल वित्‍तीय सहायता मिले, इसके लिए दिल्‍ली हाई कोर्ट से याचिका दाखिल कर अनुरोध किया गया है. मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी. इस मामले में केंद्रीय श्रम मंत्रालय और दिल्‍ली सरकार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 23, 2021, 4:37 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल कर राष्ट्रीय राजधानी में मुक्त कराये गये बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के शिकार 16 और बच्चों के पुनर्वास के लिए तत्काल वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया गया है. मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने मंगलवार को पहले से ही लंबित याचिका में दायर अर्जी पर केंद्रीय श्रम मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किये और उनसे जवाब मांगा. याचिका में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के शिकार 88 बच्चों के लिए पुनर्वास सहायता का अनुरोध किया गया है.

पीठ ने प्राधिकारों से अर्जी में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने को कहा और मामले को 19 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. मुक्त कराए गए एक बच्चे के पिता ने यह याचिका और अर्जी दाखिल की है. याचिकाकर्ता मोहम्मद कादिर अंसारी ने बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के शिकार बच्चों के लिए राहत उपायों को लेकर निर्देश देने का अनुरोध किया है. इसमें उन्होंने अपने नाबालिग बेटे का भी जिक्र किया है जो काम की तलाश में 12 साल की उम्र में बिहार से दिल्ली आया था.

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उत्पीड़न और अमानवीय बर्ताव का सामना करना पड़ावकील निमिषा मेनन, कृति अवस्थी और शिवांगी यादव द्वारा यह याचिका दायर की गयी है. याचिका में कहा गया है, ‘‘बच्चे को ऐसी जगह काम पर रखा गया जहां दो महीने से अधिक समय तक तस्कर/नौकरी पर रखने वाले मालिक के हाथों उसे उत्पीड़न और अमानवीय बर्ताव का सामना करना पड़ा. उसे दिन में 14 से अधिक घंटे तक काम करना पड़ता था और बहुत कम वेतन दिया जाता था.’’

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वकील निमिषा मेनन, कृति अवस्थी और शिवांगी यादव को उम्‍मीद है इस मामले में जल्‍द फैसला आएगा और बच्‍चों का पुनर्वास संभव होगा. अंसारी ने अपने बच्चे एवं अन्य को केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएस योजना) 2016 के तहत ‘पुनर्वास के संबंध में वित्तीय सहायता’ नहीं मिलने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है.

इस मामले में संवेदनशीलता दिखाने की मांग
याचिकाकर्ता मोहम्मद कादिर अंसारी ने कहा कि बच्‍चों के अच्‍छे भविष्‍य के लिए कई लोग सामने आ रहे हैं.  उन्‍होंने कहा कि हमने माननीय अदालत से अनुरोध किया है कि बच्‍चों के भविष्‍य का सवाल है. कई बच्‍चे हैं जो अपने परिवारों से दूर रहकर जीने के लिए काम कर रहे थे. अब उनको सही दिशा मिलनी चाहिए.  बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के शिकार बच्चों के लिए संवेदनशीलता के आधार पर काम करना होगा.








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