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Chanakya Niti For Health: गिलोय है सबसे महत्वपूर्ण औषधि, स्वस्थ जीवन के लिए आचार्य चाणक्य ने बताईं ये बातें


सेहतमंद रहने के लिए चाणक्‍य नीति की ये बातें जीवन में उतारें

सेहतमंद रहने के लिए चाणक्‍य नीति की ये बातें जीवन में उतारें

Chanakya Niti For Health: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने कई दोहों के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने के लिए कुछ महत्वपूर्ण खानपान की आदतों के बारे में बताया है. आचार्य चाणक्य की नीतियों को जीवन में उतार कर व्‍यक्ति स्वस्थ और सुखी जीवन व्‍यतीत कर सकता है.

Chanakya Niti For Health: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विख्‍यात हुए. उनके बताए सिद्धांत (Principle) और नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं. कोरोना काल (Coronavirus second wave) में जब सेहत ही सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिकता बन चुकी है ऐसे में सही खानपान और सही औषधियों का सेवन सबसे महत्वपूर्ण है ताकि व्यक्ति सेहतमंद रह सके. आचार्य चाणक्य ने कई दोहों के माध्यम से स्वस्थ जीवनजीने के लिए कुछ महत्वपूर्ण खानपान की आदतों के बारे में बताया है. आचार्य चाणक्य की नीतियों को जीवन में उतार कर व्‍यक्ति स्वस्थ और सुखी जीवन व्‍यतीत कर सकता है. आइए जानते हैं चाणक्‍य नीति की ये महत्‍वपूर्ण बातें- -गुरच औषधि सुखन में भोजन कहो प्रमान चक्षु इंद्रिय सब अंश में, शिर प्रधान भी जान॥ चाणक्‍य नीति में आचार्य चाणक्य ने गुरच यानी गिलोय को सर्वश्रेष्ठ औषधि माना है. उन्होंने कहा कि सभी इंद्रियों में आंखें सबसे महत्वपूर्ण हैं और मस्तिष्क सबसे प्रमुख है. ऐसे में आंखों का विशेष ख्याल रखना चाहिए और हमेशा अच्छे विचारों का चिंतन करना चाहिए और तनाव मुक्त रहना चाहिए ताकि मस्तिष्क सेहतमंद रहे.यह भी पढ़ें: Chanakya Niti For Success: जीवन में हमेशा सफलता, बस रखें इन बातों का ध्यान -चूर्ण दश गुणो अन्न ते, ता दश गुण पय जान ।
पय से अठगुण मांस ते तेहि दशगुण घृत मान ॥  आचार्य चाणक्य ने चाणक्‍य नीति में इस दोहे के माध्यम से बताया है कि खड़े अन्य से 10 गुना पौष्टिक पिसा हुआ अन्न होता है. पिसे हुए अन्न से दस गुना पौष्टिक दूध होता है. दूध से आठ गुना पौष्टिक मांस होता है और मांस से दस गुना पौष्टिक घी होता है. यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: चाणक्य के अनुसार, धनवान बनना चाहते हैं तो भूलकर भी न करें ये काम -वारि अजीरण औषधी, जीरण में बलवान । भोजन के संग अमृत है, भोजनान्त विषपान ॥ आचार्य चाणक्य ने चाणक्‍य नीति में इस दोहे के माध्यम से बताया है कि पानी हमेशा खाना खाने के कुछ देर बाद ही पीना चाहिए. बीच में पानी पीने से यह जहर के समान फल देने वाला हो जाता है. खाना पचने के बाद पानी पीना शरीर के लिए अमृत के बराबर होता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)









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