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DTC की 1,000 लो फ्लोर बस खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप, LG ने दिए जांच के आदेश, 3 सदस्य कमेटी करेगी जांच


लो फ्लोर डीटीसी बसों की खरीद में भ्रष्टाचार मामले पर उप-राज्यपाल ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है.  (File Photo)

लो फ्लोर डीटीसी बसों की खरीद में भ्रष्टाचार मामले पर उप-राज्यपाल ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. (File Photo)

केजरीवाल सरकार ने 1,000 लो फ्लोर डीटीसी बसों की खरीद में भ्रष्टाचार किया है. मामले की जांच के लिए एलजी ने विजेंद्र गुप्ता की ओर से लिखे गए पत्र के जवाब में बताया है कि उप-राज्यपाल ने डीटीसी बस अनुबंध में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.समिति अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.

नई दिल्ली. प्रदेश भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष और विधायक विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) ने आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) सरकार पर डीटीसी (DTC) की बसों के खरीद मामले में भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. गुप्ता ने इस मामले की जांच के लिए दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल (LG Anil Baijal) को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है. साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है.

पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने 1000 लो फ्लोर डीटीसी बसों की खरीद में भ्रष्टाचार किया है. गुप्ता ने बताया कि उनके पत्र के जवाब में दिल्ली के उप-राज्यपाल ने उन्हें बताया है कि डीटीसी बस अनुबंध में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.

दिल्ली सरकार के परिवहन और सतर्कता विभागों के सचिव तथा शहरी परिवहन विभाग, भारत सरकार के पूर्व प्रमुख ओपी अग्रवाल इस समिति के सदस्य हैं. यह समिति अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. गुप्ता ने कहा कि आम आदमीं पार्टी (AAP) सरकार मामले  को दबाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं. परन्तु सरकारी खजाने को लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

ये भी पढ़ें: DTC में अब तक 50 की कोरोना से मौत, सरकार से कहा-कोरोना योद्धा घोषित करें, 1 करोड़ की सम्मान राशि देंगुप्ता ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी 2021 में दिल्ली सरकार ने 1000 लो फ्लोर बसों का वर्क ऑर्डर दिया था, जिसकी कीमत 890 करोड़ है. इनमें से 700 बसों का ठेका जेबीएम ऑटो लिमिटेड को दिया गया था. बस खरीद के आदेश के साथ ही बसों के सालाना रखरखाव का टेंडर भी निकाला गया. यह ठेका भी उन्ही बस आपूर्तिकर्ताओं को दे दिया गया था.

बसों के मेंटेनेंस की सालाना लागत 350 करोड़ रुपए है. इतना ही नहीं मेंटेनेंस का यह ठेका बसों की खरीद के पहले दिन से ही लागू हो जाएगा जबकि बसों पर 3 साल की तो वारंटी अवधि ही है. इसका सीधा-सीधा तात्पर्य यह है कि बसों के रखरखाव पर तीन साल की वारंटी अवधि के भीतर लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च का भुगतान होगा.

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गुप्ता ने बताया कि जिस तरह से ठेका दिया गया था और जिस तरह अनुबंध के प्रावधान किए गए उसमें गहरी साजिश को भांपते हुए, सभी विपक्षी विधायकों ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को 12 मार्च, 2021 को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी. एसीबी ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय (Directorate of Vigilance) से जाँच की अनुमति माँगी थी.

भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने वाले तथ्य स्पष्ट हैं. यहां तक कि दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग की एक आंतरिक तथ्य जांच प्रणाली ने भी सौदे में हुए कदाचार को मान लिया है. गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग द्वारा जानबूझकर की जा रही देरी इस मुद्दे को दबाने का प्रयास है.









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