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Kanker News: हाथ‍ियों के आतंक के चलते सैकड़ों गांववालों को जेल में कर द‍िया जाता है बंद


छत्तीसगढ़ के कांकेर में हाथियों के उत्पात के बाद जान बचाने ग्रामीणों को जेल में बंद करना पड़ा

छत्तीसगढ़ के कांकेर में हाथियों के उत्पात के बाद जान बचाने ग्रामीणों को जेल में बंद करना पड़ा



Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के कांकेर में हाथियों के उत्पात के बाद जान बचाने ग्रामीणों को जेल में बंद करना पड़ता है. हाथी रात में गांव में तबाही मचाते है और इससे बचने को सैकड़ों लोगों को जेल में आसरा लेते हैं. पिछले 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ में मानव हाथी द्वंद में 350 से ज्यादा की मौत, 25 से ज्यादा हाथी भी मारे गए.

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से एक अनोखी तस्वीर निकलकर सामने आई है. यहां हाथियों से जान बचाने के लिए ग्रामीणों को जेल में बंद करना पड़ रहा है. दंडकारण्य के घनघोर जंगल मे मौजूद कांकेर के भानुपरतापुर के कई गांवों के सैकड़ों आदिवासियों को रात होते ही इलाके में मौजूद निर्माणाधीन जेल में हाथियों से जान बचाने के लिए छिपना पड़ रहा है. 20 से ज्यादा की संख्या में हाथी यहां दिन में जंगल मे पहाड़ियों पर सो जाते है और फिर रात में गांवो में घूमकर जमकर उत्पात मचाते है.

पिछले 1 महीने के भीतर हाथियों ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद और जशपुर में 3 लोगों को कुचलकर मार डाला है, जिसके डर के चलते हुए रोज शाम होते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जेल में शरण लेने आ जाते है. यहां जेल में बंद होकर कैदियों की तरह रात बिताते हैं और उसके बाद सुबह होते ही घरो को लौट जाते है.

ग्रामीण महिला बिजिकट्टा ने कहा क‍ि हमने इससे पहले ऐसा कभी नही देखा हाथियों के ख़ौफ़ के चलते हमे 4 बजते ही खाना बनाकर बच्चों को लेकर गांवों से निकलकर जेल में आना पड़ता है. कैदियों की तरह यहां रहते है उसके बाद सुबह होते ही खेतो में काम के लिए वापस लौट जाते है.

ग्रामीण सकलु ने बताया क‍ि हाथियों के आतंक के चलते हमे जेल में कैदियों की तरह रहना पड़ रहा है. इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखे. डर लगता है. 2 – 3 बजे के बाद ही जेल के लिए आना पड़ता है. ग्रामीणों और हाथियों के बीच द्वंद को लेकर सरकार का कहना है कि सरकार ग्रामीणों की सुरक्षा के कटिबद्ध है. ये हाथियों के भ्रमण का इलाका है पिछले साल भी हाथी यहां आए थे और यही से वापिस लौट गए थे.मुख्‍यमंत्री भुपेश बघेल ने कहा है क‍ि हाथी रायगढ़ कोरबा होते हुए बारनवापारा के जंगल से नीचे होते हुए यहां तक पहुंचे थे. अभी कांकेर में है और पिछले साल भी यहां तक आए थे. यही से वो वापस लौट जाते हैं. छत्तीसगढ़ में हाथी और मानव द्वंद की कहानी काफी पुरानी है. यहां पिछले 5 वर्षों में 350 से ज्यादा लोगों की मौत मानव हाथी द्वंद में हुई है. वहीं 25 से ज्यादा भी इसमें मारे गए. छत्तीसगढ़ में मानव और हाथी द्वंद रोकने के 2000 वर्ग किमी में हाथियों के लिए लेमरू रिजर्व एलीफैंट फ्रंट भी प्रस्तवित है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस योजना में सिर्फ भ्रष्टाचार कर रही है.

भाजपा के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा क‍ि सरकार को हाथियों और मानवों के द्वंद्व से कोई लेना देना नहीं है इसमें सिर्फ भ्रष्टाचार किया जा रहा है. सरकार ने ढाई साल में इसके लिए कुछ नहीं किया.









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