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UP विधानसभा चुनाव में क्या जीत का नया फार्मूला बनेगा CCC? क्या है इसका मूल मंत्र?- opinion up Assembly Election 2022 Will CCC the new winning formula Know what is it upas


लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 6 महीने बाद विधानसभा के चुनाव (UP Assembly Election 2022) शुरू हो जायेंगे. कोरोना के थोड़ा हल्का पड़ने के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं. पार्टियां अपनी फतह के लिए मुद्दे सेट करने लगी हैं. बुद्धिजीवियों में भी इस बात की कसरत शुरू हो गयी है कि आखिर किन मुद्दों पर पार्टियां विधानसभा का चुनाव जीतने की जुगत कर रही हैं? देश के कुछ बड़े बुद्धिजीवियों के बीच हुई चर्चा में ये बात सामने आयी है कि चुनावी किला तो ट्रिपल सी (CCC) के सहारे ही ध्वस्त होगा. तो आखिर क्या है ये CCC?

जिन बुद्धिजीवियों के बीच इस फार्मूले पर चर्चा हुई है, उनमें देश के कुछ बड़े पत्रकार और समाजशास्त्री शामिल हैं. कुछ ही दिनों पहले समाजशास्त्री बद्रीनारायण ने ट्विटर के जरिये ये चर्चा शुरू की थी. उन्होंने लिखा कि “धीरे-धीरे यूपी इलेक्शन मोड में एंटर कर रहा है. CC इस आने वाले चुनाव में गहरे प्रभाव दिखायेगा. CAST और CORONA. क्या इसके अलावा भी कोई फैक्टर होगा?”

उनके इस ट्वीट पर चर्चा चल पड़ी और बद्रीनारायण के पूछे गये सवाल के जवाब में कुछ बड़े पत्रकारों ने एक और C जोड़ दिया. वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामासेशन और प्रभात शुंगलू ने इसमें तीसरा  C- COMMUNALISM जोड़ दिया. यानी CCC बन गया- CAST, CORONA और COMMUNALISM.

प्रयागराज स्थित गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक संस्थान के निदेशक और समाजशास्त्री बद्रीनारायण ने इसे विस्तार दिया. उन्होंने कहा कि वैसे तो प्रदेश की राजनीति में जाति हमेशा से हावी रहती है लेकिन समय के साथ उसका स्वरूप बदल गया है. बड़ी पार्टियों की निगाह छोटे-छोटे जातिगत दलों पर पैनी हुई हैं. हर सीट पर कुछ वोटों के लिए जातिगत पार्टियों को जोड़ने की जोरदार कोशिशें चल रही हैं. वैसे तो इन छोटी जातिगत पार्टियों का अकेले कोई वजूद नहीं है लेकिन, किसी बड़े दल के साथ जुड़ने से जीत का फार्मूला तैयार हो जाता है.समाजशास्त्री का ट्वीट

ccc

समाजशास्त्री बद्रीनारायण का ट्वीट

कोरोना पर रैलियों में दिखेगी जुबानी जंग

बद्रीनारायण कोरोना को बड़ा फैक्टर मानते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव से ऐन पहले इस बीमारी की वजह से लगभग हर घर में या तो मातम पसरा है या फिर लोगों को विकट स्थितियों का सामना करना पड़ा है. इतनी जल्दी इस पीड़ा को भुलाया नहीं जा सकेगा. चुनावों के दौरान विपक्ष कोरोना मैनेजमेण्ट में सरकार को फेल बतायेगा जबकि सत्ता पक्ष इसके बेहतर मैनेजमेण्ट की दुहाई देगा. यानी दोनों तरफ से इस मुद्दे पर रैलियों में जुबानी जंग देखने को मिले.

रुप बदलकर चुनावों में दखल देगा कम्युनलिज्म

COMMUNALISM के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ये भी अपना रूप बदलकर चुनावों में दखल देगा. ऐसा नहीं है कि लोगों के बीच मारपीट होगी बल्कि चुनाव में ऐसे मुद्दे हावी दिखेंगे, जिससे लोग जब वोटिंग करने जायें तो उनमें साम्प्रदायिक चेतना हावी रहे. भाषणों में नये नारे आयेंगे जैसे पिछले चुनाव में अली और बजरंग बली के नारे दिये गये थे.

गौर फरमायें तो इसकी झलक मिलनी भी शुरू हो गई है. छोटी जातिगत पार्टियों पर डोरे डालने का सिलसिला शुरू हो गया है. अखिलेश यादव कह चुके हैं कि वे छोटी पार्टियों से गठबंधन करेंगे. दिल्ली में अमित शाह अपना दल और निषाद पार्टी के नेताओं से मीटिंग कर चुके हैं. कोरोना को लेकर सत्ता पक्ष और सरकार आमने-सामने है ही. साम्प्रदायिक मुद्दों की भी हल्की झलक दिखने ही लगी है. यूपी के कई जिलों से ऐसी खबरें आ चुकी हैं, जिनसे ये पता चला कि लोग मारे डर के अपना घर बेचकर गांव छोड़ना चाहते हैं.

तो इंतजार करिये कुछ और हफ्तों के बीतने का, CCC की पूरी तस्वीर सामने आ जायेगी. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के यही हथियार होंगे. बस इस्तेमाल का तरीका बदल जायेगा.





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